चौपाई सूक्ष्म रूप धरि सियही दिखावा, विकट रूप धरि लंक जरावा ।। ९।
चौपाई सूक्ष्म रूप धरि सियही दिखावा, विकट रूप धरि लंक जरावा ।। ९। भीम रूप धरि असुर संहारे । रामचन्द के काज संवारे ।। १०॥ हनुमानजी वायु पुत्र हैं। जो साधक सिद्धासन में प्राण का निरोध करने के सफल हो जाता है उसके सामने योग की आठों सिद्धियां आकर खड़ी रहती है। पवनपुत्र होने के कारण हनुमान जी को ये सब सिद्धियां सहज प्राप्त है। लंका में सीता मैया के पास जाते समय वे अणिमा सिद्धी का उपयोग करते हैं। और अति लघु रूप में छोटे से वानर बालक के रूप में सामने जाते हैं। बात करते करते सीता मैया को संशय होता है कि राम सेना में सब ऐसे ही बच्चें होंगे तो रावण को कैसे परास्त कर सकेंगे? तब हनुमान जी महिमा सिद्धि के बल से विशाल रूप प्रकट करके मैया में विश्वास जागृत करते हैं। व्यवहारिक जगत में भी मनुष्य चाहे जितना महान या मोटा बने पर स्वयं की माता के सामने तो छोटा बनकर रहने में ही उसकी शोभा है। हनुमान जी इस विवेक का यहाँ बराबर आचरण करते हैं। माँ से निम्न वरदान प्राप्त करते हैं। "अजर अमर गुननिधी सुत होहु, करहु बहुत रघुनायक पर छोहू।।" मैया को प्रसन्न कर फल खाने की आज्ञा ली और बाग में प्रवेश किया। लंका मो...