चौपाई भूत पिशाच निकट नहीं आवै। महावीर जब नाम सुनावै ।। २
चौपाई भूत पिशाच निकट नहीं आवै। महावीर जब नाम सुनावै ।। २ महावीर श्री हनुमानजी का नाम कोई बोलो तो वह सुनकर जो भूत-अनिष्ट तत्त्व हैं , वे नाम जपने वाले के नजदीक नहीं आते। भूत पिशाच जैसी भटकती आत्माओं को दूर रखने, किसी की बुरी नजर से बचाने या नजर उतारने के हनुमानजी का नाम, भक्तों के लिए बहुत माहात्म्य का है। मनुष्य स्वयं पंच महाभूतों से बना हुआ। फिर उसे एक भूत से क्या डरना। कमजोर मन वाले को भूत प्रेत तकलीफ देते महावीर श्री हनुमानजी का नाम स्मरण करते ही मनुष्य का मनोबल बढ़ जाता है दृढ़ मनोबल वाले व्यक्ति के पास भूत पिशाच का विचार भी नहीं आता।" हनुमानजी बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं और जहाँ श्रेष्ठ बुद्धि का शासन होता है वहां जड़ता, अंधश्रद्धा, शंका के भूत का टिकना मुश्किल होता है। व्यावहारिक जगत में देखें तो सत्ता का हर पद 'भूतपूर्व' हो जाता है। सत्ताधीश व्यक्ति के पास से पद चला जावे पर वह 'भूतपूर्व मंत्री', 'भूतपूर्व राष्ट्रपति' के नाम से जान जाता है। भूत सेवक हनुमानजी के पास नहीं आ सकता तो फिर पद कैसे आएगा? प्रभुराम ने सुग्रीव को किष्किंधा का राजपद द...