संदेश

भक्त को दुःख होते हुए भी लगते नहीं। लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चौपाई- तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुःख बिसरावै ।।३३ ।।

चौपाई- तुम्हरे भजन राम को पावै,            जनम जनम के दुःख बिसरावै ।।३३ ।। हनुमानजी का भजन करने वाले को प्रभु राम की प्राप्ति होती है और जन्म जन्मांतरों के दुःख दूर हो जाते हैं। दुःखों का विस्मरण हो जाता है। सामान्य तौर पर जगत में संतान की प्रशंसा करने पर उसके माता-पिता खुश होते हैं। श्री हनुमान जी श्री राम और माता जानकी के पुत्र समान है अतः तुलसी जी कहते हैं जब हम हनुमान जी के चरित्र का गान करते हैं तो स्वाभाविक रूप से राम जी प्रसन्न होते हैं। हनुमान जी के भक्त के हृदय में वे प्रकट हो जाते हैं। "पावै" के संतो ने दो अर्थ बताएं हैं? (1) हनुमान जी का भजन करने वाले को राम जी मिलेंगे। (2) आपकी तरह आपकी रीति से जो राम जी का भजन करेगा उसे राम मिलेंगे। भजन के पीछे चार प्रेरक बल होते हैं। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। जो सकाम भाव से भजन करते हैं उनकी कामना तो पूरी हो जाती है परन्तु उसको भगवान की प्राप्ति नहीं होती। जो भक्त हनुमान जी की तरह निष्काम भाव से आपकी रीति से भजन सेवा करता है उसे श्रीराम की प्राप्ति होती है। निष्काम भाव अर्थात् किसी भी प्रकार की लौकिक या पारलौक...