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हाथ बज्र और ध्वजा बिराजै, काँधे मूँज जनेऊ साजै। ५ ।।

चौपाई - हाथ बज्र और ध्वजा बिराजै,              काँधे मूँज जनेऊ साजै। ५ ।। हनुमान जी के हाथ वज्र जैसे हैं और बाएँ हाथ में गदा है जो भक्तों को दुलारती है, साधकों को संभालती है और दुष्टों को मारती है। वज्र यानि काल। काल हनुमान जी के हाथ में है।  नेमि यानि चक्र। "कालनेमि" हम सब काल के चक्र में फैसे हैं। कालनेमि को भी मार दिया हनुमान जी ने। जिनके हाथ में भगवान के यश की ध्वजा रहती है, काल उनकी मुट्ठी में आ जाता है। उन पर वज्राघात नहीं होता। काल उन्हें नहीं मारता। शरीर तो आता जाता है। मीरा, तुलसी, विठ्ठलदास, कर्माबाई, वल्लभाचार्य मरे कभी? देह तो कुछ दिन की यात्रा पर आती और चली जाती है। हनुमान जी के हाथ की रेखा में वज्र और ध्वजा की रेखाएं है यही रेखाएं भगवान राय के चरणों में हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिसके हाथ में वज्र का चिन्ह होता है वह अति बलवान, लोहे के समान मजबूत शरीर वाला तथा सर्वश्रेष्ठ योद्धा होता है। इसी तरह जिसके हाथ में ध्वजा का चिन्ह होता है वह सर्वत्र विजयी होता है उसकी कीर्ति रूपी ध्वजा चारों दिशा में फहरती है। हनुमान जी ने प्रभु राम की ...