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हनुमानजी को काल का बंधन नहीं। लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चौपाई चारों युग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा ।। २९।। साधु संत के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ।। ३० ।।

चौपाई चारों युग परताप तुम्हारा।           है परसिद्ध जगत उजियारा ।। २९।।           साधु संत के तुम रखवारे ।           असुर निकंदन राम दुलारे ।। ३० ।। धर्म ग्रंथों के अनुसार संपूर्ण जगत में बारंबार चार युगों का आगमन होता रहता है। ये चार युग हैं- सत्य, त्रेता, द्वापर और कलियुग।  हनुमानजी सत्य युग में शिवस्वरू में विराजते हैं।  त्रेतायुग में हनुमान वानर- रूप में रहते हैं।  द्वापर में अर्जुन के रथ को ध्वजा में रहे हैं और  कलियुग में पवन रूप में प्राणतत्व के रूप में रहकर सबकी रक्षा करते हैं।  काल की कसौटी पर हनुमानजी खरे उतरे हैं। चारों युगों में हनुमानजी का प्रताप है। हनुमानजी को काल का बंधन नहीं। जन्म के समय उन्हें मिले हुए वरदान के कारण यमराज या काल का प्रभाव उन्हें नुकसान नहीं पहुँचा सकता। कलियुग में जहाँ-जहाँ भगवान राम की कथा होती है वहाँ किसी न किसी रूप में वे आकर का श्रवण करते हैं। प्रभुराम का जब साकेत धाम जाने का समय हुआ तो उन्होंने हनुमानजी को बुलाकर कहा, "आप दिव्य रूप ...