चौपाई आपन तेज सम्हारो आपै, तीनो लोक हाँक ते कांपै ।। २३॥
चौपाई आपन तेज सम्हारो आपै, तीनो लोक हाँक ते कांपै ।। २३॥ हनुमानजी का तेज, पराक्रम और बल जब बढ़ने लगता है तब किसी में भी ऐसा सामर्थ्य नहीं कि उन्हें रोक सके, कारण वे स्वयं शंकरजी हैं। प्रलय करने की भी उनमें शक्ति है। लक्ष्मणजी को जब शक्ति लग जाती है और मूर्छित हो जाते हैं तब राम विलाप करने लगते हैं तब हनुमानजी प्रभुराम को कहते हैं "हे भगवन् यदि आप आज्ञा दें तो लक्ष्मणजी की मूर्छा उतारने के लिए मैं चन्द्रमा को निचोडकर उसका अमृत उपस्थित कर दूँ। आप आज्ञा करें तो पाताल में जाकर सर्पों के बीच रहे हुए अमृत कुंड को उठा लाऊँ। आप कहें तो स्वर्ग के वैद्यराज को आपके सामने ले आऊँ आदि।" और अंत में अपने तेज, पराक्रम और शौर्य को संभालते हुए कहते हैं कि एक पल के भी विलंब बिना आपको जो अच्छी लगे वह आज्ञा दीजिए, आपकी कृपा से, प्रताप से, बल से मैं उसका पालन करूँगा। जो अपना तेज संभाल सकता है वही दूसरे की तेजस्विता की कदर कर सकता है। निस्तेज हमेशा तेजोद्वेषी होता है। जिसे स्वाभिमान की परवाह नहीं ऐसे लोग दूसरों का अपमान करते हैं। ऐसे तेज निधान हनुमानजी जब रावण की सभा मे...