चौपाई - विद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर ।। ७।।
चौपाई - विद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर ।। ७।। श्री हनुमान जी वेद शास्त्रों के प्रकांड पंडित हैं। सूर्यनारायण से उन्होंने विद्या पढ़ी है। बुद्धि के देव भी सूर्य हैं। ज्ञान प्रकाश देता है। सूर्य क्षण भर भी विराम नहीं लेते। एक बार हनुमान जी ने सूर्य से विनती की आप गुरु स्थान पर बैठकर मुझे विद्या पढ़ाओ। सूर्यनारायण ने कहा मैं तो पल भर भी नहीं ठहरता तो तुम्हें कैसे विद्या कैसे पढ़ाउ ? हनुमान जी ने इसका हल निकाला। वे स्वयं सूर्य के सामने मुहँ रखकर उल्टे पैरों से दौड़ने लगे और विद्या प्राप्त की। सूर्य ने उन्हें सब विद्याओं में पारंगत बनाया। ये वेदांत के ज्ञाता, राजनीतिज्ञ, प्रखर वक्ता, प्रकांड पंडित, ज्योतिष शास्त्र, मानस शास्त्र आदि के ज्ञाता हैं। हनुमान जी गुणी हैं। दूसरे में निहित गुणों को पहचानने और समझने वाले गुनज्ञ हैं। भक्ति में निपुणता मिले उसे ही सच्ची चतुराई कह सकते हैं। संसार के लोग तो चतुर उसे मानते हैं जो प्रपंच करके दूसरे का धन हर लेता है, कला कौशल से लोगों को आकर्षित कर ले। व्यवहारकुशलता को चतुराई नहीं कह सकते। मन क...