चौपाई - लाय संजीवन लखन जियाये। श्री रघुवीर हरषि उर लाए ।।११।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरत सम भाई ।। १२ ।।
चौपाई - लाय संजीवन लखन जियाये। श्री रघुवीर हरषि उर लाए ।।११।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरत सम भाई ।। १२ ।। लक्ष्मण जी साक्षात शेषावतार हैं, उन्हें कोई मार नहीं सकता। परन्तु ब्रह्मशक्ति को ब्रह्माजी ने वरदान दिया था कि वह जिसे लगेगी वह मर जाएगा। मेघनाद ने इस शक्ति का लक्ष्मण जी पर वार किया तो वरदान की महिमा रखने के लिए लक्ष्मण जी मृत जैसे बन गए। दूसरी ओर हिमालय पर उगी हुई संजीवनी बूटी को भी वरदान था कि उसका उपयोग करने पर मृतप्राय व्यक्ति भी पुनर्जीवित हो जाएगा। लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर राम विलाप करने लगे। हनुमान जी सुषेन वैद्य को लेने गये। यह उनकी दूसरी VISIT थी लंका की। सुषेण को उपस्थित किया, उसने कहा द्रोणागिरी पर्वत पर संजीवनी बूटी यदि प्रातःकाल के पहले लाई जा सके तो लखन जी के प्राण बच सकते हैं। हनुमान जी ने सोचा लखन जी को कुछ हो गया तो राम जी प्राण छोड़ देंगे। संजीवनी लेने जाते समय हनुमान जी बोले, "भगवान चिन्ता नहीं करना, मैं सूर्यो...