सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद सारद सहित अहीसा ।। १४।।यम कुबेर दिग्पाल जहाँ ते, कवि कोविद कहि सके कहाँ ते ।।१५।।
चौपाई सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद सारद सहित अहीसा ।। १४।।
यम कुबेर दिग्पाल जहाँ ते, कवि कोविद कहि सके कहाँ ते ।।
१५।।
सनकादि ऋषि मुनि स्वयं ब्रह्मा, महर्षि नारद, माँ सरस्वती भी तुम्हारे यशोगान का गुण का, शौर्य प्रताप का वर्णन नहीं कर सकते वहाँ पृथ्वी लोक के कवि, पंडितो या विद्वानों की क्या हैसियत है। यमराज, कुबेर दिशाओं के दिग्पाल आदि समस्त देवता आपके यश का पूरा पूरा वर्णन नहीं कर सकते तो फिर पृथ्वी पर रहने वाले कवि या विद्वान आपके यश का गान कैसे कर सकते हैं?
कवि वह है जो क्रान्तदर्शी है और कोविद अर्थात् ज्ञानी कवि। जो हनुमान जी की उपासना करते हैं उन्हें उपरोक्त सब देवता आशीर्वाद देते हैं।
हम हमेशा मंदिर जाते हैं। कभी न जा पाएँ तो भगवान बैचेन होते हैं कि वह क्यों नहीं आया। यह स्थिति हनुमान जी की है।
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