चौपाई अंतकाल रघुवर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ।। ३४।।

चौपाई अंतकाल रघुवर पुर जाई । 
        जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ।। ३४।।

प्रभु राम का भक्त अंतकाल में उनके धाम में जाता है इसी को मुक्ति या मोक्ष कहते हैं। 
इसका दूसरा अर्थ है अंतकाल अर्थात् अंतिम समय में, जीवन के संध्याकाल में वृद्धावस्था में मरणासन्न व्यक्ति रघुवरपुर में अयोध्या में वास करे तो उसका दूसरा जन्म अवध में होता है और आयोध्यावास सहजरूप से व्यक्ति को रामभक्त बना देता है।
हनुमान जी की कृपा का चमत्कार साधक को अंतिम दिनों में अयोध्या जाकर रहने की प्रेरणा देता है। रघुवरपुर अर्थात साकेत। साकेत में सब ऐसे भक्त का हनुमान जी के (हरि का एक अर्थ 'वानर' होता है) भक्त की तरह आदर करते हैं।
मुक्ति में प्रभु मिलन का आनंद होता है और जीवन मुक्त दशा में प्रभु कार्य का आनंद मिलता है और संसार में ऐसे व्यक्ति प्रभु के जन (भक्त) कहलाते हैं
जिसने हनुमान जी की भक्ति की, सेवा की, उपासना की वह अंत में साकेत धाम यानि वैकुंठ को प्राप्त होता है। वैकुंठ यानि जहाँ कोई कुंठ नहीं, दुःख नहीं। आनंद ही आनंद है। अद्वैत में गए तो मुक्ति, द्वैत में आ गए तो भक्ति। मुक्ति में अस्तित्व की अनुभूति है और जीवन में खेल है। पुनर्जन्म हुआ तो फिर भक्त बनेंगे। परमात्मा के काम में आनंद है।

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