चौपाई नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा ।। २५ ।।

चौपाई नासै रोग हरै सब पीरा। 
          जपत निरंतर हनुमत बीरा ।। २५ ।।
श्री हनुमानजी के नाम का निरंतर जप करने से रोग भाग जाते हैं और पीड़ा का हरण हो जाता है।
रोग दो प्रकार के हैं। (अ) शारीरिक रोग जैसे कैंसर, बुखार, हृदय रोग, पक्षाघात आदि। (ब) मानसिक रोग जैसे काम, क्रोध, लोभ, मोह, ममता आदि। ये मनुष्य को अंदर से हताश-निराश कर पंगू कर देते हैं। "नारद पुराण" में असाध्य और भयंकर रोगों के निवारणार्थ हनुमानजी के नाम और मंत्रों की अनुष्ठान विधि बताई है. पस्तु यदि केवल -
संकट मोचन कृपा निधान, रक्षा कीजै श्री हनुमान।
इसका श्रद्धापूर्वक जप करने पर किसी भी प्रकार का रोग या भूत-प्रेत का कष्ट निवारण हो जाता है।
जप निरंतर होना चाहिये। जप में एकाग्रता होनी चाहिये। मुनि पतंजलि 'पातंजल योग सूत्र' के पहले अध्याय के २८ वें सूत्र में कहते हैं: "तज्जपस्तदर्थ भावनम्" अर्थात् जप का अर्थ और भाव समझकर ध्यानपूर्वक जप करना चाहिये। इससे उसका फल जल्दी मिलता है।
हनुमानजी सत्यनिष्ठ, धर्मनिष्ठ और कर्त्तव्यनिष्ठ हैं। उनके उपासक को अपना जीवन भी इसी प्रकार का बनाना चाहिये।
रोग मानसिक होते हैं, पीड़ा शारीरिक होती है। चिता मुर्दे को और चिंता जिंदों को जलाती है। जो हनुमानजी की भक्ति करते हैं वे चिंता नहीं चिंतन करते हैं। पीड़ा शरीर में होती है और उसका अनुभव मन में होता है। डॉक्टर इसीलए ऑपरेशन के पहले ऐनेस्थेसिया देकर मन का कनेक्शन काट देते हैं। 
हनुमानजी के नाम से या हनुमान चालीसा से क्या-क्या दूर हो सकता है। कुछ डॉक्टर कुछ बीमारी दूर कर सकते हैं बाकी के लिये दूसरे डॉक्टर के पास जाना पड़‌ता है। लेकिन हनुमानजी का नाम निरंतर जपने से "नासै रोग हरे सब पीरा।" जितने भी शारीरिक और मानसिक रोग हैं उसमें सबसे बड़ा भव रोग है। भव यानि बनना।
लखपति करोड़पति बनना चाहता है, करोड़पति रोड़पति (अर्थात रस्ते का नाम उसके नाम से जाना जाए) बनना चाहता है। छोटे पद पर कार्य करने वाला व्यक्ति बड़ा पड़ जाता है। अर्थात अधिक अधिक और अधिक चने की भवना
बहुत से शारीरिक रोग पूर्व कर्मों से लग जाते हैं। मानसिक कारण से भी रोग लग जाते हैं। जिसका मन विचलित हो, कामनाएँ, क्रोध, लोभ हो मन में तो शरीर बीमार पड़ जाता है। ईर्ष्या से खुजली, क्रोध से Blood Pressure बढ़ता है। मन में प्रेम और उत्साह होगा तो शारीरिक रोग नहीं होगा। भौगोलिक कारण, खानपान, मानसिक कारण, पूर्व कर्म, कितने पाप किये आदि भी कारण हो सकते हैं। हनुमानजी सभी प्रकार के रोग और पीड़ा (दुःखों) को दूर कर देते हैं
किसी व्यक्ति ने पूछा कितनी बार पढ़ने से पीड़ा दूर होगी? एक संत ने उत्तर दिया, यदि रोग दूर नहीं भी हो तो भी सहन करने की शक्ति मिल गई तो रोग रोग नहीं लगेगा। जो सचमुच में भगवान की भक्ति करते हैं उन्हें स्वप्न में भी दुख नहीं हो सकता। भक्त का कभी नाश नहीं हो सकता। शरीर का कष्ट कुछ भी हो पर हृदय में राम नाम रहे तो कष्ट नहीं होता।

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