चौपाई जुग सहस्त्र जोजन पर भानु, लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।। १८ ।।

चौपाई जुग सहस्त्र जोजन पर भानु, 
          लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।। १८ ।।
सूर्य पृथ्वी से करोडों मील दूर है। वैज्ञानिकों के अनुसार सात करोड़ बत्तीस लाख मील दूर है और सूर्य बिम्ब सोलह हजार मील के घेरे में फैला हुआ है।
जन्म होते ही हनुमान जी को खूब भूख लगी। ऊपर नजर की तो आकाश में लाल रंग के सूर्य देव उदय हो रहे थे। उनको फल मानकर गर्जना की और ऊपर उड़ने लगे। सूर्य के पास पहुँचे तब राहू सूर्य को ग्रस रहा था (सूर्य ग्रहण था) हनुमान जी ने अपनी पूंछ फटकारी तो वह भयभीत होकर मूर्छित हो गया। हनुमान जी ने सूर्य को हाथ में पकड़ लिया और अपना मुहँ सूर्य से भी बड़ा करके मुहँ में रख लिया। हनुमान जी को ख्याल आया कि यह कोई फल नहीं है तो उसे छोड़ दिया और उससे खेलने लगे।
राहू मूर्छा उतरने पर इन्द्र की शरण गया और सब हकीकत बताई। हाथ में वज्र लेकर देव सेना के साथ इन्द्र हनुमान जी के पास पहुँच गए। लड़ाई शुरु हुई देव सैन्य को हनुमान जी ने हरा दिया इसलिए इन्द्र ने बाल हनुमान के जबड़े पर वज्र प्रहार किया इससे वे बेहोश हो गए। पवन देव इन्द्र पर बहुत कोपायमान हुए और हनुमान जी को गोद में लेकर संसार में पवन प्रवाह (वेग) बन्द कर दिया, प्राणवायु को रोक दिया। तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। पवनदेव बोले, "यदि मेरे बालक को कुछ हो गया तो मैं चराचर विश्व सहित समस्त देवताओं को नष्ट कर दूंगा।"
सब देवताओं ने पवन देव को शांत किया और हनुमान जी को स्वस्थ कर दिया और वायुदेव को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जी को वरदान देने लगे। विष्णु जी ने कहा वायुदेव आपका पुत्र निर्भीक बनेगा और एक कल्प तक चिरंजीव रहेगा। शिवजी ने कहा - इस पर चलाए गए अमोघ अस्त्र शस्त्र भी विफल होंगे और मेरे तीसरे नेत्र की अग्नि भी इसका कुछ नहीं कर सकेगी। ब्रह्मा जी ने कहा मेरा ब्रह्मशस्त्र या ब्रह्मपाश भी इसका अनिष्ट नहीं कर सकेंगे। इन्द्र ने कहा मेरा अमोघ वज्र भी इस पर कोई प्रभाव नहीं कर सकेगा और इसका पूरा शरीर ही वज्र का बन जाएगा। इसकी हनु (दाढी) पर प्रहार हुआ अतः यह बालक जगत में हनुमान नाम से विख्यात होगा। वज्र जैसे अंगो वाला होने से वज्रांगी नाम से प्रसिद्ध होगा (जो अपभ्रंश होते होते बजरंग बली नाम से जाना जाने लगा। कुबेर ने कहा आपका पुत्र समस्त असुरों का संहार करने में सक्षम होगा। यम ने कहा, मेरे काल दंड का भय इस पर कोई प्रभाव नहीं डाल सकेगा। वरुण ने कहा यह मेरे जैसा शक्तिशाली बनेगा और महा भयंकर युद्ध की भी इसे थकान नहीं लगेगी। यह इस बात की प्रतीति करता है कि हनुमान जी अनेकानेक सिद्धियों के साथ जन्मे हैं। जितना ऊंचा चाहे उड़ सकते हैं, जितना चाहे शरीर को विशाल या छोटा कर सकते हैं चाहे जब वानर जब चाहे तब मानव बन सकते हैं अनेक प्रकार की योग शक्तियों के साथ जनमे हैं।
सूर्य ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक है। जन्मते ही हनुमान जी को ज्ञान और प्रकाश की भूख लगी। हमारी भूख अंधकार की है।
पूज्य मुरारी बापू कहते हैं - सूर्य को निगल जाना अर्थात सूर्य के ज्ञान, प्रकाश, विवेक, कर्त्तव्य परायणता को आत्मसात करने का सार्मथ्य प्राप्त करना। गुरु को जो शिष्य बराबर पकड़ सके, ग्रहण कर सके, उसे गुरु अपनी सब विद्या देते हैं। सूर्य ने हनुमान जी को सब विद्याएं सिखाई है। हनुमंत उपासना जीवन में प्रकाश लाती है।
एक संत कहते हैं बच्चे हमेशा चांद-सूरज की ही बातें करते हैं आटा-दाल का भाव नहीं पूछते । बच्चे बड़ी-बडी बातें करते हैं तो पिताजी कहते हैं बडे होंगे तब जान जाओगे। हनुमान जी ने सबसे ऊँची चीज को अपना लक्ष्य बनाया और उसे प्राप्त करके दिखाया। HIGHER AND NOBLER THE GOAL, THE POTENTIAL WILL COME OUT यदि लक्ष्य उंचा रखे और उसके लिए हृदय में श्रद्धा रखकर कार्य करें तो हनुमान ज की तरह सूरज तक भी पहुँच सकते हैं। बच्चे थे तब ही लक्ष्य प्राप्त कर लिया।
कितनी भी ऊंचाई हो कितना भी असंभव हो, "मैं पा ही लूंगा" यह तो जवानी है। जवानी या बुढ़ापा उम्र से नहीं वृत्ति से माना जाता है। भीष्म 180 वर्ष की उम्र सेनापति बने थे और युवा लगते थे, जीवन में लक्ष्य ऊंचा होना चाहिये। दान में, तप में विद्या में, आदर्श ऊंचा होना चाहिये। जीवन में कोई बात असंभव नहीं। आज के जवान को भी अपनी शक्ति की विस्मृति हुई है अतः पीछे जामवंत जैसा जगाने वाला चाहिये पीठ बल चाहिये। डरपोक का विकास नहीं होता। दूसरे पर निर्भर होंगे उतने दुखी रहोगे आत्म निर्भर रहोगे तभी सुखी रहोगे। जब तक सुरक्षा का डर है, साहस नहीं होगा, विकास नहीं होगा। हनुमान जी छलांग मारकर आकाश में उड़े, सागर कूद गए।

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