चौपाई जो यह पढ़े हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा ।।३९॥
चौपाई जो यह पढ़े हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा ।।३९॥
हनुमान चालीसा के पढने की कोई विधि नहीं है. नियम नहीं है। अखबार की तरह पढोगे तो भी बेडा पार हो जाएगा। इसका एक ही नियम है नित्य पाठ करो। और खंडित न हो यही निषेध है। इसके साक्षी स्वयं शंकर भगवान हैं। और उनके पास अनेक सिद्धियाँ हैं। अशोक वाटिका में माँ जानकी ने उनको आशीर्वाद दिया।
सब देवता सब सुख नहीं दे सकते लेकिन हनुमान जी भौतिक आध्यात्मिक, लोक-परलोक, भोग और भगवान को भी प्राप्त करा सकते हैं।
दुनियाँ में देव हजारों हैं, बजरंग बली का क्या कहना। इनकी भक्ति का क्या कहना, इनकी शक्ति का क्या कहना ।।
ये सात समुन्दर लांघ गए, और गढ़ लंका में कूद गए। रावण को डराना क्या कहना, लंका को जलाना क्या कहना ।।
जो प्रारब्ध में नहीं है या भाग्य में नहीं है वह भी हनुमान जी प्राप्त करा देते हैं। इसकी साक्षी भगवान शंकर दे रहे हैं। जो भाग्य में नहीं है और यदि गलत लिखा गया उसे भी मिटाना भगवान शंकर के ही बस की बात है। सब प्रकार की सिद्धियाँ प्रदान करने वाले हैं वे भगवान को समुद्र के पार करवाया हमें भी भवसागर से पार करा देंगे।
तुलसीदासजी यहाँ पाठ की फलश्रुति बताते हैं। पाठ से निश्चित सिद्धि मिलेगी ऐसा गोस्वामीजी दावे के साथ कह रहे हैं।
अध्यात्म शास्त्र का नियम है कि साधक जिस देव या देवी की उपासना उपासना चिंतन या ध्यान करता है उनके तमाम गुण धीरे-धीरे साधक में आने लगते हैं। हमेशा एकाग्रता से ध्यानपूर्वक चालीसा का पाठ करने से धीरे-धीरे साधक में भी हनुमान जी की पवित्रता, भक्ति सेवा भाव आदि गुण संक्रांत होते हैं। इससे बड़ी उपलब्धि क्या हो सकती है?
रावण ने इसका मार्मिक और सचोट जवाब देते हुए कहा, "मैंने यह कोशिश भी करके देख ली है। जब मैं राम बनने का विचार करता हूँ उसी समय जगत की तमाम स्त्रियों में मुझे माँ दिखने लगती है। और सीता जी को प्राप्त करने का विचार मेरे मन में से निकल जाता है।"
आत्म सिद्धि से श्रेष्ठ कोई सिद्धि नहीं। हनुमान चालीसा का नित्य नियम पुर्वक पाठ करने से यह सिद्धि मिलती है।
एक संत कहते हैं, सबसे उंची सिद्धि है भक्ति। जो भी पढ़े केवल पढ़े तो भी। मनन करने पर तो और समझकर पढ़ने पर तो बहुत फायदा हो सकता है। इसमें अचिन्त्य शक्ति है क्योंकि यह सिद्ध है, शिवजी का आशीर्वाद है। बिना समझे पढ़े तो भी बहुत लाभ होगा। शिवजी का आशीर्वाद है। बिना समझे पढ़े तो भी बहुत लाभहोगा। शिवजी का आशीर्वाद कभी विफल नहीं होता। तुलसीदास जी कविता में प्रवीण है, 'गौरीसा' कहा। माता का हृदय जल्दी द्रवित हो जाता है। माता भी और उनके पति शिव दोनों साक्षी है। शंकर जी समाधि में बैठ जाएँ तो माता उन्हें याद दिलाएगी। जो पढ़ेगा उसे सिद्धि मिलेगी ही।
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