चौपाई- यह सत बार पाठ कर कोई। छूटै बंदि महसुख होई ।। ३८ ।।
चौपाई- यह सत बार पाठ कर कोई।
छूटै बंदि महसुख होई ।। ३८ ।।
सत का एक अर्थ होता है सात, दूसरा अर्थ होता है एक सौ। बार अर्थात समय या वार (दिन)। हनुमान जी का दिन मंगलवार।
(१) हमेशा सौ बार पाठ करना या सात बार पाठ करना।
(२) हर मंगलवार को सौ बार पाठ करना।
ऐसा करने से परमसुख की प्राप्ति होती है मनोविज्ञान कहता है कि विचारों या भावों को निष्ठा, आत्मबल और दृढ़ संकल्प से बार बार दोहराने पर उनके अनुसार फल निश्चित मिलता है। भवबंधन से मुक्ति चाहिये तो मृत्यु पर्यंत रोज हनुमान चालीसा का पाठ करने से शरीर छूटने पर मुक्ति मिलती है।
एक संत कहते हैं हनुमान चालीसा का जो सौ बार पाठ करेगा। वह बंधन से छूट जाएगा। मुक्ति में आनन्द है, बन्धन में नहीं। बन्धन में सुरक्षा तो है पर स्वातंत्र्य नहीं। पिंजरे के पक्षी के पास आकाश नहीं। बन्धन बड़ा दुःख है और मुक्ति महा सुख। 'सा विद्या या विमुक्तये।' गुरु कृपा से ही मुक्त हुआ जा सकता है। "यह सत बार पाठ कर कोई"। 'कोई' कहा है। केवल पुरुष के लिए ही नहीं, स्त्रियाँ भी हनुमान चालीसा का पाठ कर सकती हैं। नारी तो क्या पशु पक्षियों का भी, जो भी सुने उनका भी कल्याण हो जाता है। कुछ लोग कहते हैं नारियों को पाठ नहीं करना चाहिए, हनुमान ब्रह्मचारी हैं। ब्रह्मचारी हैं इसलिये तो अधिक अच्छा हैं। ब्रह्मचारी के साथ भाई या बेटे का ही संबंध हो सकता है। चाहे नारी हो या नर हो, जो 'कोई' भी हो सत बार करो। सत यानि सात, कोई कहते सौ बार, एक दिन में सौ बार। दिन में एक बार भी कर दो या मंगल या शनिवार को सात बार कर दो। यदि समय नहीं है तो खाने के समय कर दो। लेकिन जीवन में एक दिन सौ बार पाठ जरूर करो। सब साथ मिलकर पाठ करो। बच्चों को कराओ। जीवन में, देश में उन्नति होगी।
हमारे जीवन में हनुमान जी आएं तो सब राक्षस चले जाएंगे। यह फल श्रुति तुलसीदास जी ने नहीं लिखी, शिव जी ने आशीर्वाद दिया। तुलसीदास जी पर बहुत संकट आए तब शिवजी ने कहा हनुमान जी पर चालीस चौपाई लिखो। वह पढ़कर शिवजी प्रसन्न हुए और आशीर्वाद दिया।
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