चौपाई और मनोरथ जो कोई लावे, सोई अमित जीवन फल पावे ।। २८ ।।
चौपाई और मनोरथ जो कोई लावे,
सोई अमित जीवन फल पावे ।। २८ ।।
लोग हनुमानजी के पास धन प्राप्ति, पुत्र कामना, शत्रु विजय आदि इच्छाएँ लेकर जाते हैं ये सब ईच्छाएँ कामनाएँ कहलाती हैं। हनुमानजी अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं।
वैष्णव संप्रदाय का एक उत्तम शब्द है "मनोरथ"। सांसारिक इच्छा 'कामना' कहलाती है जबकि प्रभु के लिये किया गया कोई भी कार्य, या भावना या प्रभुप्राप्ति की आतुरता "मनोरथ" कहलाती है।
"और मनोरथ" यानि साधक यदि भक्त की या राम-प्राप्ति की भावना करे तो हनुमानजी उसे 'अमित जीवन फल' देते हैं। रामचरित मानस में जीवन का फल इस प्रकार कहा है :
सब साधन कर सफल सुहावा ।
राम लखन सिय दर्शन पावा ।।
जहँ लगी साधन वेद बखानी।
सब कर फल हरि भगति भवानी ।।
रामदर्शन और रामभक्ति में ही जीवन की सफलता है। हनुमानजी ने गोस्वामीजी को यह फल प्रदान किया। इस रामफल का रस, भक्ति का रस अमित है। यह जन्म जन्मांतरों में भी नहीं सूखता।
एक संत कहते हैं, जो भी ईच्छा हनुमानजी के पास लेकर जाएंगे वह तो पूरी होती ही है पर उससे अमित ज्यादा ही मिल जाता है अर्थात जिसकी कोई सीमा न हो।
मनोरथ में हम कुछ भी मांग लेते हैं लेकिन हमें कहना चाहिये, "भगवान मेरे लिये जो ठीक हो वह दे दो।" भगवान से मिलता है वह कल्याणकारी ही होता है भगवान से हम जो भी मांगते हैं वह सब नहीं मिलता। जो हमारे लिये अच्छा है वह भगवान देते हैं जैसे- माँ बालक को सर्दियों में आइस्क्रीम मांगने पर भी नहीं देती । नादरजी को बंदर का वेश दे दिया कारण भगवान नारदजी का कल्याण चाहते थे। इस मनोरथ के साथ भगवान के पास जाते हैं और आते हैं तब अमित फल लेकर आते
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