चौपाई- सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना ।। २२।।

चौपाई- सब सुख लहै तुम्हारी सरना। 
           तुम रक्षक काहू को डरना ।। २२।।
जगत में सुख के दो प्रकार हैं- भौतिक साधनों से प्राप्त होने वाला सुख जैसे -गाड़ी, बंगला, फर्नीचर, प्रोपर्टी, स्वस्थ और बलवान शरीर आदि से दूसरा अनुभूति जैसे- भावना प्रधान स्वभाव, नम्रता, क्षमा, विनय, विवेक, सहृदयता, कुशाग्र बुद्धि से मिलने वाला सुख।
श्री हनुमानजी की शरण जाने से सांसारिक सुख तो मिलता ही है और राम भक्ति का वरदान भी मिलता है जिससे निष्काम भक्ति करते-करते मोक्ष का अधिकारी बना जा सकता है।" सब सुख लहै तुम्हारी सरना" का एक दूसरा अर्थ है, "जगत के तमाम सुख हनुमानजी की शरण में रहते हैं और सदा हनुमानजी की आज्ञा की प्रतीक्षा में होते हैं। हनुमानजी के आदेश देने पर वे सुख उस भक्त के पास जाते हैं।
जिसके रक्षक हनुमानजी हों, वह संसार में किसी से नहीं डरता। सब देवी देवता भी समझ जाते हैं कि इस साधक ने हनुमानजी की शरण स्वीकारी है, अतः उसे कष्ट देंगे तो अपनी तकलीफ का पार नहीं। इसलिये शनिदेव, यमराज, दुर्भाग्य आदि पास भी नहीं आते।
एक संत कहते हैं, सबको सुखी करना मुश्किल है। एक का सुख दूसरे का दुःख है और कोई भी सब सुख नहीं दे सकता। केवल भगवान या भगवदीय व्यक्ति ही सब सुख दे सकता है। हनुमानजी सबको और सब प्रकार के सुख दे सकते हैं।
भगवान को जब समर्पण कर दिया तो फिर "तुम रक्षक काहू को डरना।" जैसे- बच्चा माँ की शरण में निश्चिन्त होता है। विश्वास पूरा होता है, माँ पर बालक का वैसे ही "तुम रक्षक काहू को डरना।"
हनुमानजी जब रक्षक बनकर खड़े हैं तो डरना क्यों? हनुमानजी की शरण में जाने पर निष्पाप हो जाते हैं। जगत का राजा परमात्मा है और उसके चरण पकड़ लिये तो फिर किसका डर?
जगत की रक्षा अधूरी पड़ती है। अतः जगत की बारिश में भगवान की छत्री में घुस जाओ। दुनियाँ के छातों में दम नहीं है। भगवान का छत्र सर्व व्यापक है।

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