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हमें हिंदुत्व को समझने के लिए कुछ पौराणिक कथाओं के जरिए हमारी सभ्यता संस्कृति को समझना होगा.... पिछले क्रम में हमने कुछ विशेष बालकों के उदाहरण को ले करके समझा था की हमारी संस्कृति क्या है उसी क्रम को जारी रखते हुए विशिष्ट बालक मारकंडे के बारे में और अन्य बालकों के बारे में जानेंगे। धर्म ग्रंथों के अनुसार मार्कंडेय ऋषि अमर है। आठ अमर लोगों में मार्कंडेय ऋषि का भी नाम आता है। प्राचीन समय में मर्कण्डु ऋषि और सुव्रता की कोई संतान नहीं थी। तब उन्होंने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए तप किया। शिव जी प्रकट हुए और उन्होंने कहा कि आपके भाग्य में संतान सुख नहीं है, लेकिन आपने तपस्या की है इसलिए हम आपको पुत्र प्राप्ति का वरदान देते हैं। भगवान शिव ने उनसे पूछा कि भी गुणहीन दीर्घायु पुत्र चाहते हैं या गुणवान 16 वर्ष का अल्प आयु पुत्र। तब ऋषि ने कहा कि उन्हें अल्पायु लेकिन गुणी पुत्र ही चाहिए। भगवान शिव ने उन्हें यह वरदान दे दिया। बालक मार्कंडेय बहुत मेधावी निकले। 16 वर्ष की आयु से पहले ही उन्होंने वेदों का ज्ञान प्राप्त कर लिया। उनके आचार्यगण उनकी प्रशंसा करते हुए थकते नहीं थे। वे कहते हैं-" मार्...

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हिन्दूत्व मात्र एक धर्म नहीं, एक व्यापक विचारधारा है; जिसकी बाल्यावस्था पित्रोश्च पूजनं कृत्वा प्रकान्तिं च करोति यः। तस्य वै पृथिवीजन्यफलं भवति निश्चितम्। अपहाय गृहे यो वै पितरौ तीर्थमाव्रजेत्। तस्य पापं तथा प्रोक्तं हनने च तयोर्यथा।। पुत्रस्य यः महत्तीर्थ पित्रोश्चरणपंकजम्। अन्यतीर्थ तु दूरे वै गत्वा सम्प्राप्यते पुनः।। इदं संनिहितं तीर्थं सुलभं धर्मसाधनम्। पुत्रस्य च स्त्रीयाश्चैव तीर्थ गेहे सुशोभनम्।। ' जो पुत्र माता-पिता की पूजा करके उनकी प्रदक्षिणा करता है,  उसे पृथ्वी परिक्रमाजनित फल सुलभ हो जाता है।  जो माता-पिता को घर पर छोड़ कर तीर्थ यात्रा के लिए जाता है, वह माता- पिता की हत्या से मिलने वाले पाप का भागी होता है, क्योंकि पुत्र के लिए माता- पिता के चरण सरोज ही महान तीर्थ है। अन्य तीर्थ तो दूर जाने पर प्राप्त होते हैं, परंतु धर्म का साधन भूत यह तीर्थ तो पास में ही सुलभ है। पुत्र के लिए माता-पिता रूपी सुंदर तीर्थ घर में ही बुद्धिमान है।' ये मानव मात्र को सिखाया है प्रथम पूज्य श्री गणेश ने। ऐसे ही अगर एक और बालक का उदाहरण देखें विष्णु भक्त ध्रुव प्राचीन काल की बात है राज...