नव उत्साह नव चेतना
भारतीय स्वतंत्रता के 75 वर्ष में प्रवेश की आप सभी पाठकों को हार्दिक शुभकामनाएं। स्वतंत्रता हर मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है। तुलसीदास जी ने भी कहा है 'पराधीन सपनेहु सुख नाहीं' अर्थात् पराधीनता में तो स्वप्न में भी सुख नहीं मिलता। पराधीनता हर किसी के लिए अभिशाप है। वह चाहे मनुष्य हो चाहे कोई भी प्राणी। 'सामर्थ्यमूलम स्वतंत्र्य, श्रममूलम् च वैभवम्' यानि किसी समाज की, किसी भी राष्ट्र की आजादी का स्रोत उसका सामर्थ्य होता है और उसके वैभव, उन्नति, प्रगति का स्रोत उसकी मानव शक्ति है। आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं, उसके पीछे मां भारती के लाखों बेटे बेटियों का त्याग, उनके बलिदान और मां भारती को आजाद कराने के संकल्प के प्रति उनका समर्पण हैं। आज ऐसे सभी हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को, आजादी के वीरों को, रणबांकुरे को, वीर शहीदों को नमन करने का पर्व है। हमारा सौभाग्य है कि हमने भारत की पुण्य भूमि पर जन्म लिया और आजादी के सुंदर वातावरण में सांस ले रहे हैं देश प्रेम एक पवित्र भाव है जो हर एक नागरिक में होना अनिवार्य है आज हम आजादी की खुली हवा में सांस ले रहे हैं ...